Wednesday, 27 March 2019

Filmfare Awards 2019:

Filmfare Awards 2019:
 जानिए विजेताओं की पूरी सूची


बॉलीवुड फिल्मों के लिए दिए जाने वाले सबसे प्रसिद्ध पुरस्कार फिल्मफेयर अवार्ड्स 2019 हाल ही में मुंबई में प्रदान किये गये. यह पुरस्कार 20 से अधिक श्रेणियों में दिए गये हैं. इस वर्ष फिल्म ‘राज़ी’ के लिए आलिया भट्ट ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता, वहीं रणबीर कपूर ने ‘संजू’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्राप्त किया.

64वें फिल्मफेयर पुरस्कारों की सूची

1.    बेस्ट एक्टर (पुरुष) - रणबीर कपूर (संजू)

2.    बेस्ट एक्टर (महिला) - आलिया भट्ट (राज़ी)

3.    क्रिटिक्स कैटेगरी बेस्ट एक्टर (पुरुष) - रणवीर सिंह(पद्मावत), आयुष्मान खुराना (अँधाधुन)

4.    बेस्ट डायरेक्टर - मेघना गुलज़ार (राज़ी)

5.    क्रिटिक्स कैटेगरी बेस्ट एक्टर (महिला) - नीना गुप्ता (बधाई हो )

6.    पॉपुलर च्वायस कैटेगरी बेस्ट फिल्म - राज़ी

7.    बेस्ट स्टोरी - अनुभव सिन्हा (मुल्क)

8.    बेस्ट स्क्रीनप्ले - अंधाधुन

9.     बेस्ट डायलॉग - बधाई हो

10.    क्रिटिक्स कैटेगरी में बेस्ट फिल्म - अँधाधुन

11.    बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (महिला) - सुरेखा सिकरी (बधाई हो)

12.    बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल - विक्की कौशल (संजू) गजराज राव (बधाई हो)

13.    बेस्ट डेब्यू (पुरुष) - ईशान खट्टर (बियाण्ड द क्लाउड्स)

14.    बेस्ट डेब्यू (महिला) - सारा अली खान (केदारनाथ)

15.    बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर - अमर कौशिक (स्त्री )

16.    बेस्ट प्लेबैक (पुरुष) - अरिजीत सिंह (राज़ी)

17.    सर्वश्रेष्ठ गीतकार – गुलज़ार (राज़ी)

18.    बेस्ट प्लेबैक (महिला) - श्रेया घोषाल

19.    बेस्ट बैकग्राउड स्कोर - डेनियल जॉर्ज (अँधाधुन)

20.    बेस्ट सिनेमेटोग्राफी - पंकज कुमार (तुम्बाड)

21.    बेस्ट वीएफएक्स - रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट (ज़ीरो)

22.    बेस्ट कोरियोग्राफी - कृति महेश मिद्या और ज्योति तोमर (पद्मावत)

23.    बेस्ट कॉस्टयूम - शीतल शर्मा (मंटो)

24.    बेस्ट प्रोडक्शन डिज़ाइन - नितिन जिहानी चौधरी और राजेश यादव (तुम्बाड)

फिल्मफेयर अवार्ड्स पृष्ठभूमि

फिल्मफेयर पुरस्कार . इसकी शुरुआत सबसे पहले 1954 में हुई जब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की भी स्थापना हुई थी.

21 मार्च 1954 को होने वाले पहले पुरस्कार समारोह में सिर्फ पाँच पुरस्कार रखे गये थे जिसमें दो बीघा ज़मीन को सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए बिमल राय (दो बीघा ज़मीन), सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए दिलीप कुमार (दाग), सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए मीना कुमारी (बैजू बावरा), एवं इसी फिल्म में सर्वश्रेष्ठ संगीत के लिए नौशाद को सम्मानित किया गया था.

Saturday, 23 March 2019

उत्तराखण्ड में रहने वाली जनजातियाँ

भारत की कुल जनगणना में आदिवासी 8.61% है।
भारत में 427 अनुसूचित जनजातियों हैं।
अधिकांश भारतीय कबीलों का निवास वनों में है और वे वन्य प्राकृतिक साधनों पर ही निर्भर करते हैं।
जनजाति वास्‍तव में भारत के आदिवासियों के लिए इस्‍तेमाल होने वाला एक वैधानिक पद है। भारत के संविधान में अनुसूचित जनजाति पद का प्रयोग हुआ है और इनके लिए विशेष प्रावधान लागू किये गए हैं।

उत्तराखण्ड में रहने वाली भोटिया, थारू, जौनसारी,बुक्शा एंव राजी जनजातियों  को वर्ष 1967 में अनुसूचित जनजाति घोषित किया गया था। ये पाॅच जनजातियों मे बुक्सा एवं राजी जनजाति आर्थिक, शैक्षिक एवं सामाजिक रूप से अन्य जनजातियों की अपेक्षा काफी निर्धन एवं पिछड़ी होने के कारण उन्हें आदिम जनजाति समूह की श्रेणी में रखा गया है।
जनसंख्या वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार
प्रदेश की कुल जनसंख्या
1,00,86,292
अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या
2,91,903  (2.9%)
बी.पी.एल. परिवारो के अनुसूचित जनजतियों की जनसंख्या
26,295
लिंगानुपात-963
इस 5 जनजातियों में सबसे अधिक जनसँख्या थारू एवं सबसे कम राजी जनजाति की है। 2001 की जनगणना के अनुसार राजी 682 तथा थारू 82,790 जनसँख्या उत्तराखंड में निवास करती है।

जनजातियों में सबसे अधिक जनसँख्या उधम सिंह नगर( 1,23,037) और सबसे कम जनसँख्या  रुद्रप्रयाग (386) में हैं।
% के अनुसार सबसे अधिक उधम सिंह नगर( 7.46%) और सबसे कम टिहरी (0.14%) में है।
साक्षरता- 73.9%( महिला-62.5, पुरुष- 83.8%)
आरक्षण- संविधान के अनुछेद 332 के अनुसार, राज्य की 70 विधानसभा शीटों में 2 शीट st के लिए आरक्षित है। एक चकरोता( देहरादून) दूसरी नानकमत्ता (उ सी नगर)
इसके अलावा राजकीय सेवा,शिक्षण संस्थाओं,निगमो इन सभी में 4 % आरक्षण की व्यवस्था है।

आरक्षण

अनुच्‍छेद 243घ
पंचायतों में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण का उपबंध करता है।
अनुच्‍छेद 330
लोक सभा में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण का उपबंध करता है।
अनुच्‍छेद 332
विधान सभाओं में अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण का उपबंध करता है।

थारू

उधम सिंह नगर जिले में मुख्य रूप से खटीमा, किच्छा, नानकमत्ता और सितारगंज के 141 गांव में थारू लोग निवास करते है।  थारू समुदाय उत्तराखंड का सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय  है।
उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर गोंणा, बहराइच, महराजगंज, सिद्धार्थ नगर आदि जिलों, बिहार के चंपारण तथा दरभंगा जिलों तथा नेपाल के पूर्व में भेंची से लेकर पश्चिम में महाकाली नदी तक तराई एवं भाबर क्षेत्रों में फैले हुए है।

उत्पत्ति

सामान्य: थारुओं को किरात वंश का माना जाता है। जो कई जातियो और उप जातियों में विभाजित है। थारू शब्द की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में अनेक मतभेद है। कुछ विद्वान राजस्थान के थार मरुस्थल से आकर बसने के कारण इन्हें थारू कहते है ।लेकिन ”थारू जनजाति” के लोग स्वयं को  महाराणा प्रताप की सेना का मानते हैं।

आवास

ये लोग अपना मकान बनाने के लिए लकड़ी, पत्तों और नरकुल का प्रयोग करते है। दीवारों पर चित्रकारी होती है। प्रत्येक घर में पशुबाड़ा (Stockyard) व घर के सामने प्राय: पूजा स्थल (Places of worship) होता है।

भोजन (Food)

इनका मुख्य भोजन चावल और मछली है।

सामाजिक स्वरूप (Social Structure)

सामाजिक रूप से यह कई गोत्रों या जातियों (Castes) में बटे हैI बड़वायक, बट्ठा, रावत, वृतियाँ, महतो व डहेत इनके प्रमुख गोत्र या घराने है। बडवायक सबसे उच्च मानें जाते है।

शारीरिक गठन- 
ये देखने में मंगोल प्रजाति के नजर आते है।

भाषा
इनकी कोई विशेष भाषा नही है ये जिस इलाके में रहते है वही की भाषा बोलते हैं।

वेशभूषा



धर्म

थारू, हिन्दू धर्म को मानते है। पछावन, काली, नगरयाई देवी, भूमिया, करोदेव सहित अनेक देवी-देवताओं, भूत-प्रेतों तथा अपने पूर्वजों  की भी पूजा करते है।

त्यौहार

दशहरा, होली, दिवाली, माघ की खिचड़ी, कन्हैया अष्टमी और बजहर इनके प्रमुख त्यौहार है।
बजहर नामक त्यौहार ज्येष्ठ या बैशाख में मनाया जाता है, दिवाली को ये शोक पर्व के रूप में मनाते है।
होली फाल्गुन पूणिमा के आठ दिनों तक मनाया जाता है, जिस में स्त्री व पुरुष दोनों मिलकर खिचड़ी नृत्य करते है।

अर्थव्यवस्था

थारू लोग प्राय: सीधे-सादे व ईमानदार होते है। इनका आर्थिक जीवन सामान्य रूप से कृषि, पशुपालन व आघेट पर आधारित होता है। लेकिन अब समय के साथ लोग नौकरी की ओर भी जाने लगे है।



1-थारू जनजाति के लोगो का निवास स्थान है →खटीमा, सितारगंज, किच्छा, नानकमत्ता, बनबसा आदि
 2-थारू जनजाति के लोग स्वयं को मानते है →राणा प्रताप के वंशज
3-थारुओ के शारीरिक लक्षण किस प्रजाति से मिलते है →मंगोल प्रजाति से
4-इतिहासकारों के अनुसार थारुओ का वंशज माना जाता है →किरात वंश
5-थारू जनजाति के लोगो का मुख्य व्यवसाय है →कृषि, आखेट, पशुपालन
6- थारू जनजाति के लोगो का मुख्य भोजन है →चावल, मछली
7-थारू जनजाति के लोगो का प्रिय पेय पदार्थ है →जाड़ (चावल की शराब)
8-थारू समाज है → मातृसत्तात्मक
9- थारू जनजाति के पुरूषों की वेशभूषा है →लंगोटी, कुर्ता, टोपी, साफा एवं सफ़ेद धोती
10- थारू जनजाति स्त्रियों की वेशभूषा है→लहंगा, चोली, आभूषण
11- थारू समाज के प्रमुख देवी देवता है →पछावन, खड्गाभूत काली, भूमिया, कलुवा, आदि
12- थारू लोग दीपावली को किस पर्व के रूप में मानते है →शोक के पर्व के रूप में
13-थारु जनजाति के लोगो में विवाह की कितनी पधतिया प्रचलित है→4
14-थारु जनजाति में विधवा विवाह के बाद दिए जाने वाला भोजन कहलाता है →लठभरता भोजन
15- थारु जनजाति में सगाई की रस्म कहलाती है →अपना-पराया
16- थारु जनजाति के मुख्य त्यौहार है →दशहरा, होली, दीपावली, बज़हर,माघ की खिचड़ी आदि
17- थारु जनजाति की प्रमुख कुरियां (गोत्र) है → बाडवायक, बट्ठा रावत वृत्तियाँ, महतो व डहैत
18-थारु जनजाति में विवाह की पधतिया है→ अपना-पराया, बात-कट्ठी, विवाह, चाला

Saturday, 16 March 2019

धर्मनगरी हरिद्वार

धर्मनगरी हरिद्वार:



हर-की-पौड़ी जो ब्रम्हकुंड के नाम से भी प्रसिद्ध है, हरिद्वार के सबसे पवित्र एवं प्रसिद्ध स्थलो में से एक है। हरिद्वार वह स्थान है जहाँ गंगा नदी पहाड़ों को छोड़ने के बाद मैदानों में प्रवेश करती है।
हर-की-पौड़ी का निर्माण उज्जैन के प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य द्वारा अपने भाई भ्रहत हरी की याद में करवाया था, जो गंगा नदी के घाट पर बैठ कर ध्यान किया करते थे। उन्होंने यहाँ नीति शतक व वैराग्य शतक पुस्तके लिखी।
एक मान्यता ये भी है कि जब देवताओ और राक्षसों ने समुद्र मंथन किया था तो अमृत की कुछ बुँदे यहाँ ब्रह्मकुंड में गिरी थी इसीलिये इस स्थान को बहुत पवित्र माना जाता है।

इस स्थान से संबंधित कई मान्यताओं में से एक यह है  कि  भगवान् ब्रम्हा, जिन्हें सृष्टि का रचना की भी ,उन्होंने यहाँ एक यज्ञ किया था। यहाँ घाट पर पदचिन्ह है जो ऐसा कहा जाता है कि भगवान् विष्णु के हैं।

ऐसा माना जाता है कि हर-की-पौड़ी में एक बार डुबकी लगाने पर एक व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं। भक्त बड़ी संख्या में यहाँ कुछ प्रथाओं जैसे कि ‘मुंडन’ (सिर की हजामत) एवं ‘उपनयन’ (एक प्रारंभिक संस्कार), जनेऊ संस्कार को करने के लिए आते हैं।
  प्रत्येक 12 वर्ष के पश्चात यहाँ ‘कुंभ मेले’ का आयोजन किया जाता है जिसे देखने के लिए  लाखो भक्त यहाँ आते हैं।

 तथा माँ गंगा के विषय में नारद पुराण में वर्णित कथा के अनुसार   राजा सागर की दो पत्नियां थी, केशनि और सुमती उन्हें एक बार ऋषि औरवा द्वारा दो वरदान दिए गए थे, पहला वरदान "एक बुद्धिमान और पवित्र पुत्र" जो एक दिन एक महान राजा बन जाएगा और दूसरा वरदान "साठ हजार पुत्र"।

केशनि ने बुद्धिमान बेटे के लिए चुना और सुमती ने साठ हजार पुत्रों का विकल्प चुना।

सुमती के साठ हजारों बेटों ने राजा सागर के लिए कई समस्याएं पैदा कीं। इंसान,  इंद्र और अन्य देवता उनके बेटों  से तंग आ चुके थे।

एक बार जब राजा से अश्विमेध यज्ञ किया ।
एक अश्वमेध यज्ञ में,  एक घोड़े को खुला छोड़ देता हो जो विभिन्न राज्यों के माध्यम से यात्रा करता है।

उसके साठ हजार पुत्र भी राजा सागर द्वारा जारी घोड़े का पीछा करते रहे। फिर इंद्र ने घोड़ा चुरा लिया और उस स्थान पर छिपा दिया जहां ऋषि कपिला ध्यान कर रही थे।

जब उसके पुत्रों ने  कपिला के पास घोड़े की खोज की तो उन्होंने सोचा कि संत ने इसे चोरी कर लिया तो उनसे अशब्द बोलना शुरू कर दिया। ऋषि कपिला  ने गुस्से में आकर  अपनी आँखें खोलीं और साठ हजार पुत्रों को राख में बदल दिया। यह स्थान उस स्थान पर माना जाता है जहां हर साल गंगा सागर मेला आयोजित किया जाता है ।
राजा सागर के पोते मौके पर पहुंचे और ऋषि कपिला को माफी के लिए प्रार्थना करते रहे। ऋषि वापस बेटों को वापस नहीं ला सकता था, लेकिन उन्होंने कहा कि  भविष्य में राजा भगीरथ जी गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी तक लाएंगे, तब वे मोक्ष प्राप्त करेंगे।

कई पीढ़ियों के बाद, भगिरथ का जन्म  हुआ और उन्होंने महान तपस्या की फिर ब्रह्मा और शिव गंगा को पृथ्वी पर लाने को कहा।

फिर जब गंगा स्वर्ग से उत्तरी तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटा बांधा तब गंगा का वेग कम हुआ  गंगा की शक्ति पृथ्वी को नष्ट कर सकती थी।
फिर भागीरथ ने हरिद्वार से गंगा को गुजारकर अपने पूर्वजों को पाप से मुक्ति दिलाई।

उत्तराखण्ड कुंड ठन्डे कुंड-: 1. पिथौरागढ़-: सूर्य कुंड (गौरी कुंड), नंदा कुंड 2. रुद्रप्रयाग-: नंदी कुंड 3. उत्तरकाशी-: देवकुंड 4. बागे...